WHO WE ARE

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद् का गठन ब्राह्मणों के स्वाभिमान की रक्षा करने, उनकी सुरक्षा, सहयोग एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली में संगठित समाज की ही आवाज सुनी जाती है। हमारे संगठित नहीं होने के कारण हमारी सर्वत्र उपेक्षा की जा रही है। हमारे पूर्वजों को लक्ष्य कर झूंठ एवं मनगढ़न्त कहानियां गढ़कर हमें निशाना बनाया जा रहा है और विभिन्न जातिवादी संगठन एवं राजनैतिक दल हमारे प्रति घृणा तथा द्वेष की भावना पैदा कर रहे हैं।  राजनैतिक दलों में उपस्थित हमारे स्वजातीय नेता भी इस सम्बन्ध में चुप रहते हैं और प्रायः हमारे विरुद्ध पारित होने वाले नित नये नियम-कानूनों पर अपनी सहमति जताते हैं, क्योंकि वे जातीय गौरव से रहित एवं छुद्र स्वार्थ के लिए अपना स्वाभिमान दांव पर लगाकर राजनीति में आये हैं। जबकि दूसरी जातियों के नेता अपनी जाति एवं वर्ग के साथ खुलकर खड़े होते हैं, उनके सम्मेलनों में जाते हैं, उनकी मांगो के समर्थन में संसद एवं विधान सभाओं में आवाज बुलन्द करते हैं।  इन विडम्बनाओें की समाप्ति हेतु परिषद् आप सबका आवाहन करती है, कि आईये हम सब मिलकर संगठित होकर एक वृहद् परिवार की धारणा लेकर आगे बढें। जिससे जिस किसी भी क्षेत्र में सहयोग हो सके अपने भाई/बहिन, बच्चों एवं बुजुर्गों का सहयोग करें। अपने ब्राह्मण होने पर गर्व करें, अपनी पहचान पुनः स्थापित करें।  हम कान्यकुब्ज, सरयूपारी, सनाढ्य, जुझौतिया, सारस्वत, मैथिल, बंगाली, मराठी, उड़िया, भट्ट, गिरि, गुसाई, भूमिहार, महापात्र, पंडा, द्रविड़ आदि जो भी अपने को ब्राह्मण मानता, कहता व लिखता है उन सबको बिना किसी गोत्र, क्षेत्र, वेश-भूषा अथवा खान-पान के भेदभाव के एक समान ही परिवार का सदस्य मानते हैं। परिषद् किसी भी धर्म, जाति, वर्ण या वर्ग के विरुद्ध नहीं है। हमारा उद्देश्य अपने को सुरक्षित, समर्थ एवं सशक्त कर अपने पूर्वजों की तरह ही प्राणी मात्र का कल्याण करना है।  सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्। भगवान श्री परशुराम विजयते।

OUR MISSION आज ब्राह्मण जाति शेष समाज के निशाने पर दिखाई देती है। कारण विगत में कुछ लोगों द्वारा समाज के अन्य समूह विशेष कर निम्न वर्ग के प्रति किये गये भेदभाव तथा विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा ’’फूट डालो और राज करो‘‘ की नीति के तहत रचे गये षडयंत्र जिसमें जानबूझकर कतिपय ग्रन्थों में ऐसी बातें डलवाई गई कि समाज के दूसरे वर्ग पढ़कर ब्राह्मणों के प्रति द्वेषभाव से ग्रसित हो जांय तथा इस जाति को समाज के अन्य वर्गों से अलग-थलग किया जा सके। स्वयं ब्राह्मणों ने भी अपने मध्य विभिन्न कारणों से अनेक भेद-प्रभेद पैदा किये। ये भेद वंश, गोत्र, स्थान, ज्ञान आदि अनेक आधार पर किये गये परिणामस्वरूप इतने उपनाम सृजित हो गये कि आज एक ज्ञानी ब्राह्मण ही यह बताने में असमर्थ है कि पूरे विश्व या देश में कुल कितने प्रकार के ब्राह्मण हैं। इस भिन्नता एवं भेदभाव से पूरा ब्राह्मण समाज ही छिन्न-भिन्न हो गया और जिस समाज की जिम्मेदारी सभी वर्गों को आपस में जोड़कर एक रखने तथा निरन्तर विकास के साथ ही राष्ट् को एक सू़त्र में बांधकर रखने की थी वही आज कई टुकड़ों में बिखर कर रह गया है, जिसका लाभ विघटनकारी तत्व उठाकर समाज को अनेक झूंठे कथा-कहानियों के आधार पर बांटने में लगे हुये हैं।  ऐसी स्थिति में न्यास यह निर्णय लेती ह,ै कि देश के सभी ब्राह्मणों को एकजुट करने हेतु एक कार्यकारिणी की आवश्यकता है, जो परिषद् की विभिन्न इकाईयों का संचालन करते हुये पूरब से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण तक के सभी ब्राह्मणों को एकजुट करे। उनमें आपस के भेदभाव को दूर करने के साथ ही शेष समाज के विभिन्न वर्गों को भी एकसूत्र में पिरोने का कार्य करे। संगठन बिना किसी भेदभाव के क्रमशः स्वहित से परहित की ओर यात्रा करे। प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ ही उन्हें आधुनिक परिवेश में परिष्कृत एवं प्रचारित करे। साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारा एवं राष्ट्र-निष्ठा को बढ़ावा दें। ब्राह्मणों के लिये कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के साथ ही शेष समाज की भी भागीदारी सुनिश्चित करे।.

न्यास द्वारा अनुमोदित संविधान एवं कार्य-योजना के विपरीत किसी भी ईकाई अथवा पदाधिकारी/सदस्य द्वारा कार्य किये जाने पर न्यास एवं उससे एक श्रेणी की ऊपर की कार्यपरिषद् को उस इकाई को भंग करने अथवा उस पदाधिकारी/सदस्य को निलम्बित अथवा बर्खास्त करने का अधिकार होगा।  अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के राज्यवार अथवा आवश्यकतानुसार अन्यत्र भी अलग-अलग राष्ट्रीयकृत बैंकों में न्यास के नाम पर खाते हो सकते हैं, किन्तु उनका संचालन परिषद के पदाधिकारी ही करेंग,े जिनकी नियुक्ति प्रबन्ध न्यासी द्वारा स्व-विवेक से की जायेगी। किसी भी प्रकार की शिकायत अथवा आवश्यकता न होने की दशा में प्रबन्ध न्यासी को खाते का संचालन रोकने अथवा स्थाई रूप से बंद करने का अधिकार होगा।  न्यास कभी भी अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के सम्बन्ध में ऊपर वर्णित शर्तों में संशोधन, परिवर्तन अथवा परिवर्धन भी कर सकती है, जिसका अनुपालन परिषद के सभी स्तर के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी के लिए बाध्यकारी होगा। .